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मैंने उससे बातें भी खूब की, जैसे क्या कर रही है, मुझे देखा कि नहीं, मेरे से कब मिलोगी.. वगैरह वगैरह…!
उसने भी चूतिया बनाने वाले जवाब दिए।
उसने कहा- वो भी मेडिकल में है, उसने मेरा फोटो फ़ेसबुक पर देखा, कल ही मेरे से मिलेगी, फिल्म देखने के बहाने!
अब यार पहली बार कोई लौंडिया को बिना देखे मिलने जाना था, मेरी गांड फट रही थी कि कहीं छम्मक-छल्लो जैसी ना हो, काली सी ना हो, यह सब सोच कर मैं अपने दो दोस्त अभिषेक और शुभम को अपने साथ ले गया और उन्हें समझा दिया कि उसे पता ना चले कि तुम लोग मुझे जानते हो।
मैंने मूवी के टिकट ले लिए और उसका इंतजार करने लगा, साथ में गांड भी फट रही थी कि कोई काली सी लड़की चेप ना हो जाए।
करीब 15 मिनट बाद अंजलि के साथ एक लड़की आई, कसम से एकदम मस्त माल.. मोटे-मोटे मम्मे, कमर पतली, गांड हाए… हाए.. दिल पे छुरियाँ चल गईं…!
अंजलि ने उससे मेरा परिचय करवाया, उसका नाम तो बताना ही भूल गया, उसका नाम संस्कृति था। अब मेरे दोस्तों ने मुझे देख कर मैसेज किया- बेटा मिल गई चोदने को रापचिक लौंडिया…! अब तो हमें भूल ही जाएगा…!
उनका मैसेज पढ़ कर मुझे अपने आप पर गर्व हुआ, हम लोग थियेटर में पहुँच गए।
सामने मूवी चल रही है और मैं संस्कृति के मम्मे देख रहा हूँ। अब हिम्मत करके मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा तो उसने अपना हाथ वहाँ से हटा लिया।
मेरी किस्मत तो देखो साला… तभी इंटरवल हो गया।
फिर साला टॉयलेट में दोस्तों ने पकड़ लिया। सवाल ऐसे पूछे जो सिर्फ़ दोस्त ही पूछ सकता है।
एक बोला- अबे साले ‘चूमा’ कितनी देर तक लिया?
दूसरा- चूची दबाकर मज़ा आया कि नहीं?
तीसरा- चूची चूसी या नहीं?
उसने भी चूतिया बनाने वाले जवाब दिए।
उसने कहा- वो भी मेडिकल में है, उसने मेरा फोटो फ़ेसबुक पर देखा, कल ही मेरे से मिलेगी, फिल्म देखने के बहाने!
अब यार पहली बार कोई लौंडिया को बिना देखे मिलने जाना था, मेरी गांड फट रही थी कि कहीं छम्मक-छल्लो जैसी ना हो, काली सी ना हो, यह सब सोच कर मैं अपने दो दोस्त अभिषेक और शुभम को अपने साथ ले गया और उन्हें समझा दिया कि उसे पता ना चले कि तुम लोग मुझे जानते हो।
मैंने मूवी के टिकट ले लिए और उसका इंतजार करने लगा, साथ में गांड भी फट रही थी कि कोई काली सी लड़की चेप ना हो जाए।
करीब 15 मिनट बाद अंजलि के साथ एक लड़की आई, कसम से एकदम मस्त माल.. मोटे-मोटे मम्मे, कमर पतली, गांड हाए… हाए.. दिल पे छुरियाँ चल गईं…!
अंजलि ने उससे मेरा परिचय करवाया, उसका नाम तो बताना ही भूल गया, उसका नाम संस्कृति था। अब मेरे दोस्तों ने मुझे देख कर मैसेज किया- बेटा मिल गई चोदने को रापचिक लौंडिया…! अब तो हमें भूल ही जाएगा…!
उनका मैसेज पढ़ कर मुझे अपने आप पर गर्व हुआ, हम लोग थियेटर में पहुँच गए।
सामने मूवी चल रही है और मैं संस्कृति के मम्मे देख रहा हूँ। अब हिम्मत करके मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा तो उसने अपना हाथ वहाँ से हटा लिया।
मेरी किस्मत तो देखो साला… तभी इंटरवल हो गया।
फिर साला टॉयलेट में दोस्तों ने पकड़ लिया। सवाल ऐसे पूछे जो सिर्फ़ दोस्त ही पूछ सकता है।
एक बोला- अबे साले ‘चूमा’ कितनी देर तक लिया?
दूसरा- चूची दबाकर मज़ा आया कि नहीं?
तीसरा- चूची चूसी या नहीं?

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