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अब सालों से क्या कहता कि बहनचोद ने हाथ पर हाथ भी ना रखने दिया।
कुछ देर बाद मैं वापस थियेटर में पहुँच गया। अब मेरी गांड जल रही थी, उस लड़की के साथ मैं चुपचाप मूवी देखने लगा।
अब उसने ही मेरे हाथ पर हाथ रखा और पूछा- नाराज़ हो क्या?
लड़की ने शुरू किया तो मैंने मुस्कुरा कर कहा- नहीं.. नाराज़ नहीं हूँ… बस मूवी देख रहा हूँ।
उस दिन तो सिर्फ़ उसका हाथ ही पकड़ कर रह गया।
दो दिन बाद मैं फिर उसके साथ मूवी देखने गया। इस बार साली का चूमा भी लिया। उसके बाद तो आए दिन ही मूवी देखने भाग जाता था।
अब तो साली के मम्मे भी पिए और दबाए.. बस इससे ज़्यादा कुछ नहीं हुआ।
होता भी कैसे… थियेटर में तो जब मम्मे ही दबाने जाते हैं।
अभी सात दिन पहले मैंने उससे अपने हॉस्टल में आने के लिए कहा। शायद आज किस्मत साथ दे रही थी इसलिए हॉस्टल का मालिक भी नहीं था। सभी लड़के कोचिंग गए थे, जो सुबह वाले बैच के थे, वो सो रहे थे। अब मैंने अपने दोस्त को हॉस्टल के दरवाज़े पर खड़ा कर दिया और मैं अपनी आइटम को लेने चला गया।
साली कोचिंग के पास खड़ी थी, कन्धों पर बैग टांग रखा था.. हरे रंग का टॉप और जीन्स पहन रखी थी।
अपनी कसम… पूरी ब्लू-फिल्म की पॉर्न-स्टार लग रही थी। पर पता नहीं चलता, लड़कियों की दूर से गांड देख कर कैसे साला सबका लण्ड खड़ा हो जाता है, मेरा तो आज तक नहीं हुआ।
बस गांड को देखना अच्छा लगता था, पर दूर से देखने पर खड़ा कभी नहीं हुआ।
उसको अपने साथ लाने से भी गांड चौड़ी हो रही थी। क्योंकि उस एरिया में मेरे को सब जानते हैं!
मैंने संस्कृति से कहा- मेरे पीछे-पीछे आ जाओ… मेरे दोस्त शोएब ने संस्कृति और मुझे हॉस्टल में एंट्री करवाई.. पता नहीं शोएब ने क्या ऐसा किया था, पर उस दिन तो पूरा हॉस्टल खाली था।
अपनी आइटम को अपने रूम में लेकर आ गया, अब वो साली मेरे से बातें चोदने लगी!
संस्कृति- वैसे बाबू, तुम्हारी उमर क्या है?
कुछ देर बाद मैं वापस थियेटर में पहुँच गया। अब मेरी गांड जल रही थी, उस लड़की के साथ मैं चुपचाप मूवी देखने लगा।
अब उसने ही मेरे हाथ पर हाथ रखा और पूछा- नाराज़ हो क्या?
लड़की ने शुरू किया तो मैंने मुस्कुरा कर कहा- नहीं.. नाराज़ नहीं हूँ… बस मूवी देख रहा हूँ।
उस दिन तो सिर्फ़ उसका हाथ ही पकड़ कर रह गया।
दो दिन बाद मैं फिर उसके साथ मूवी देखने गया। इस बार साली का चूमा भी लिया। उसके बाद तो आए दिन ही मूवी देखने भाग जाता था।
अब तो साली के मम्मे भी पिए और दबाए.. बस इससे ज़्यादा कुछ नहीं हुआ।
होता भी कैसे… थियेटर में तो जब मम्मे ही दबाने जाते हैं।
अभी सात दिन पहले मैंने उससे अपने हॉस्टल में आने के लिए कहा। शायद आज किस्मत साथ दे रही थी इसलिए हॉस्टल का मालिक भी नहीं था। सभी लड़के कोचिंग गए थे, जो सुबह वाले बैच के थे, वो सो रहे थे। अब मैंने अपने दोस्त को हॉस्टल के दरवाज़े पर खड़ा कर दिया और मैं अपनी आइटम को लेने चला गया।
साली कोचिंग के पास खड़ी थी, कन्धों पर बैग टांग रखा था.. हरे रंग का टॉप और जीन्स पहन रखी थी।
अपनी कसम… पूरी ब्लू-फिल्म की पॉर्न-स्टार लग रही थी। पर पता नहीं चलता, लड़कियों की दूर से गांड देख कर कैसे साला सबका लण्ड खड़ा हो जाता है, मेरा तो आज तक नहीं हुआ।
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अपनी आइटम को अपने रूम में लेकर आ गया, अब वो साली मेरे से बातें चोदने लगी!
संस्कृति- वैसे बाबू, तुम्हारी उमर क्या है?

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