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मैं- मैं 19 साल का हूँ…!
संस्कृति- झूठ मत बोलो जान…!
मैं- सच जानू…!
संस्कृति- तुम तो मेरे से एक साल छोटे हो.. मैं 20 की हूँ…!
मैं- तो क्या हुआ.. आज कल तो सब चलता है…!
इस तरह चोदू किस्म की बातें.. जिनसे मुझे गुस्सा और आने लगा था.. मन कर रहा था कि बहनचोद को अभी धक्के मार कर बाहर निकल दूँ, पर मैंने अपने पर काबू किया..!
मुझे उस वक़्त उसकी चूत जो दिख रही थी।
मैं- प्यार उम्र नहीं देखता… अब तुम मेरे से प्यार करो या ना करो मैं तो करूँगा..!
इतना कहते ही मैंने अपने होंठ उसके होंठ से मिला दिए और लगा साली को चूसने। वो इसके लिए तैयार नहीं थी, लेकिन थोड़ी देर में उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी।
पर वो ये सब अभी नहीं चाहती थी, वो मुझसे प्यार करने लगी थी। चुदाई के बारे में तो उसने कभी सोचा ही नहीं था, पर मैंने उसकी बात ज़्यादा ना सुनते हुए उसे दोबारा चुम्बन करने लगा।
मैंने उसे बिस्तर पर धक्का दिया, आज उसके आने की खुशी में मैंने बिस्तर फूलों से सजाया था। अब मैं उसके कपड़े उतारने लगा, थोड़ी सी देर में मैंने उसे नंगी कर दिया।
अब शर्म की वजह से मुझसे आकर चिपक गई, मैंने उससे बेतहाशा चूमा, अब वो मेरा साथ देने लगी थी।
मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए, मैं भी अब उसके सामने नंगा था।
मैं उसके चूचे पी रहा था, जो सच में बहुत बड़े-बड़े थे, मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे।
मैं कभी उसका दायाँ मम्मा कभी बायाँ मम्मा चूस रहा था।
मैं धीरे-धीरे नीचे आया, जहाँ चूत होती है और उसकी बुर चाटने लगा। एकदम साफ-सुथरी और गुलाबी चूत, जिस पर एक भी बाल नहीं था। संस्कृति सिसकारियाँ ले रही थी, मुझे भी मज़ा आ रहा था।
इसी बीच संस्कृति झड़ गई।
संस्कृति- झूठ मत बोलो जान…!
मैं- सच जानू…!
संस्कृति- तुम तो मेरे से एक साल छोटे हो.. मैं 20 की हूँ…!
मैं- तो क्या हुआ.. आज कल तो सब चलता है…!
इस तरह चोदू किस्म की बातें.. जिनसे मुझे गुस्सा और आने लगा था.. मन कर रहा था कि बहनचोद को अभी धक्के मार कर बाहर निकल दूँ, पर मैंने अपने पर काबू किया..!
मुझे उस वक़्त उसकी चूत जो दिख रही थी।
मैं- प्यार उम्र नहीं देखता… अब तुम मेरे से प्यार करो या ना करो मैं तो करूँगा..!
इतना कहते ही मैंने अपने होंठ उसके होंठ से मिला दिए और लगा साली को चूसने। वो इसके लिए तैयार नहीं थी, लेकिन थोड़ी देर में उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी।
पर वो ये सब अभी नहीं चाहती थी, वो मुझसे प्यार करने लगी थी। चुदाई के बारे में तो उसने कभी सोचा ही नहीं था, पर मैंने उसकी बात ज़्यादा ना सुनते हुए उसे दोबारा चुम्बन करने लगा।
मैंने उसे बिस्तर पर धक्का दिया, आज उसके आने की खुशी में मैंने बिस्तर फूलों से सजाया था। अब मैं उसके कपड़े उतारने लगा, थोड़ी सी देर में मैंने उसे नंगी कर दिया।
अब शर्म की वजह से मुझसे आकर चिपक गई, मैंने उससे बेतहाशा चूमा, अब वो मेरा साथ देने लगी थी।
मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए, मैं भी अब उसके सामने नंगा था।
मैं उसके चूचे पी रहा था, जो सच में बहुत बड़े-बड़े थे, मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे।
मैं कभी उसका दायाँ मम्मा कभी बायाँ मम्मा चूस रहा था।
मैं धीरे-धीरे नीचे आया, जहाँ चूत होती है और उसकी बुर चाटने लगा। एकदम साफ-सुथरी और गुलाबी चूत, जिस पर एक भी बाल नहीं था। संस्कृति सिसकारियाँ ले रही थी, मुझे भी मज़ा आ रहा था।
इसी बीच संस्कृति झड़ गई।

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